झाबुआ। शहर की फॉरेस्ट कॉलोनी में तेंदूपत्ता अधिकारी राघव उपाध्याय द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने की खबर सामने आई है। वे मूल रूप से उज्जैन के रहने वाले थे और झाबुआ में करीब 7 वर्षों से पदस्थ थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और शव को फंदे से उतारने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है, लेकिन आत्महत्या के पीछे के कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाए हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, राघव उपाध्याय हाल ही में मानसिक तनाव में थे, लेकिन उन्होंने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया, यह जांच के बाद ही साफ होगा। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजने की तैयारी चल रही है। घटना को लेकर वन विभाग के अधिकारी भी स्तब्ध हैं।
झाबुआ। भील सेना संगठन की एक अहम बैठक आज सम्पन्न हुई जिसमें आगामी विश्व आदिवासी दिवस (9 अगस्त) के कार्यक्रम की रूपरेखा तय की गई। इस वर्ष आयोजन में डीजे संस्कृति से हटकर आदिवासी ढोल, मांदल, फड़-गीत और पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से अपनी समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि टांट्या भील, बिरसा मुंडा और राणा पूंजा भील जैसे आदिवासी महापुरुषों की झांकियां निकाली जाएंगी, जिससे समाज को अपने गौरवशाली इतिहास और मूल्यों का संदेश दिया जा सके। इस दौरान संगठन को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए गए। राणापुर ब्लॉक अध्यक्ष पद पर बदेसिंह वाखला की नियुक्ति की गई। बैठक में भील सेना संगठन के जिला अध्यक्ष रवि भूरिया, ब्लॉक अध्यक्ष गोलू वसुनिया, राजेश डामोर, अनेश मेड़ा, गोविंद डामोर, प्रकाश वाखला सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। संगठन के जिला अध्यक्ष रवि भूरिया ने कहा कि "अब समय है कि हम अपनी असली पहचान और संस्कृति को मंचों पर और सड़कों पर गर्व क...
✍️ ऋतिक विश्वकर्मा झाबुआ। आरोग्य की आस्था और योजनाओं के वादों से सजा “आयुष्मान आरोग्य मंदिर” नामक यह भवन झाबुआ के गढ़वाड़ा में खड़ा तो है, लेकिन स्वास्थ्य सेवा देने के बजाय खुद ही सेवा की आस में बैठा लगता है। बाहर से देखकर लगेगा कि शायद खुला होगा... क्योंकि खिड़की खुली मिलती है। लेकिन जरा पास जाइए - लोहे की चैनल गेट के पीछे मोटा ताला मुस्कुराता मिलेगा – जैसे कह रहा हो, आओ, देखो... लेकिन अंदर मत आओ... यह दृश्य यहां कोई नई बात नहीं है, यह तो अब सामान्य परंपरा बन चुकी है। बाहर से खुला, अंदर से बंद – मानो शासन-प्रशासन की नीतियों का जीता-जागता प्रतीक। अब बात करें यहां पदस्थ सीएचओ (सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी) की – तो वो महोदया झाबुआ शहर में ही विराजती हैं, और स्वास्थ्य केंद्र की जमीन से ज्यादा आवश्यकता उन्हें शहर की हवा लगती है। नियम तो कहते हैं कि आपात स्थिति में रात्रि विश्राम यहीं करें... लेकिन हकीकत कहती है - यहाँ रात क्या, दिन में भी कोई दिखे तो किस्मत समझिए... क्या कहता है नियम... समय अनुसार केंद्र खुला हो कर्मचारी उपस्थित हों रात्रि...
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