मध्यप्रदेश भाजपा में हाेगा बड़ा फैरबदल... कई जिलाध्यक्ष व कुछ जिलों के प्रभारी भी बदले जा सकते है...

संगठन में और कसावट लाने प्रदेश भाजपा जल्द ही कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेने की तैयारी में हैै। इसमें एक दर्जन से ज्यादा जिलाध्यक्षों को बदलने से लेकर वहां के प्रभारियों की भी रवानगी हो सकती है। इसके लिए प्रदेश संगठन ने प्रभारियों एवं अन्य माध्यमों से जिला संगठनों की रिपोर्ट तलब की है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रदेश प्रवास के बाद इस मामले में संगठन स्तर पर चर्चा होगी और इसके बाद निर्णय लिया जा सकता है। सूत्रों की माने तो कुछ जिलों के प्रभारी मंत्री भी बदले जा सकते हैै।संगठन को मजबूत बनानें में जुटा पार्टी नेतृत्व

मिशन 2023 की तैयारी में जुटी भारतीय जनता पार्टी संगठन को मजबूत बनाने की कवायद में जुटी है। इसके लिए जहां बूथ लेबल से लेकर जिला स्तर पर पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को अहम जिम्मेदारी सौपी जा रही है, तो वहीं निष्क्रिय और जनाधारविहीन पदाधिकारियों से दायित्व वापस लेने की तैयारी भी हो रही है। संगठन से जुड़े सूत्रों की माने तो प्रदेश नेतृत्व ने उन जिलों की सूची तैयार कराई है,जहां पार्टी को पिछले निकाय और पंचायत चुनाव में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले है। बताया गया है कि इन जिलों के प्रभारियों से रिपोर्ट मांगी गई है, कि वहां का जिला संगठन किस तरह से कार्य कर रहा है। वहां चुनावी परिणाम पार्टी के हित में नहीं आएं है,इसके पीछे मूल वजह क्या है। इसके अलावा उन लोगों की सूची भी मांगी गई है,जिन्होंने चुनाव के दौरान पार्टी का साथ नहीं दिया। बागियों की भी सूची मांगा ली गई है और उन्हें मनाने के लिए जिला नेतृत्व द्वारा किस तरह के प्रयास हुए है,इस बारे में पूछा गया है। इसी तरह प्रदेश संगठन नेे यहां के प्रभारियों की सक्रियता और उनका जिले में कितना प्रवास रहा,यह भी जिला संगठन से पूछा गया है। इनके अलावा पार्टी ने संघ व अन्य माध्यमोंं से भी जिला संगठन के पदाधिकारियों व संगठन प्रभारियों के बारे में भी रिपोर्ट मांग ली है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

झाबुआ के फॉरेस्ट कॉलोनी में तेंदूपत्ता अधिकारी ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, पुलिस मौके पर मौजूद

भील सेना की बैठक सम्पन्न - विश्व आदिवासी दिवस पर ढोल-मांदल और झांकियों से संस्कृति का होगा प्रदर्शन, राणापुर ब्लॉक अध्यक्ष बनाए गए बदेसिंह वाखला

रामभरोसे आरोग्य मंदिर - बाहर से ‘खुला’, भीतर से ‘ताला’, सेवा कहाँ गुमशुदा...?